क्हाणी कह रै कागला, हुंकारो दे रै महिया ।
आंधिये ने चोर लेग्या ,भाज रै पंगळिया ।।
एक बात है ,ध्यान स्यूं सुण ज्यो.....
सात भायां रै बीच एक लाडेसर बहन ही, नाम हो "सोनल"।
सगळा घर रा बिंको बहोत लाड राखता पण सब स्यूं छोटोड़ी
भाभी नै बा अणखांवणी लागती। बा भाभी सोनल नै दुरछिर राखती।
टैम बित्यो अ'र सोनल मोट्यार जुवान होगी। सोनल रो बापू
उण रो सम्बंध एक सांतरी जग्यां, खांवता - कमावता, धीणे-धापे हाळा घर ,पक्को कर दियो।
सब स्यूं छोटोड़ी भोजाई एक दिन आप रै मोट्यार ने कह्यो कै
थें मनै बा ही चूनड़ी लार द्यो जकी सोनल ओढ़े। भाई घणो ही समझायो कै तनै बजार स्यूं दूसरी चूनड़ी ल्या देस्यूं अ'र बीं नांव
फूटरी ल्या देस्यूं पण भोजाई तो आटी पाटी ले परी र' कोप भवन में सो गी कै मरूं न मारूं ल्यूं तो बा सागी चूनड़ी ल्यूं जकी थारी बहन सोनल ओढ़े।
एक दिन सोनल रोही में छाणा चुगण गई ही। सागै वाळी सगळी छोरियाँ आगै निकळगी सोनल लारै रह गी। रास्ते मैं एक मोडियो
जावण लाग रियो हो, सोनल बींने कह्यो बाबोजी खारियो उंचा द्यो। बो बोल्यो मेरे लारे आवै जका बाबोजी चका देसी।
घड़ी पलक में ही दूसरो मोडियो आयो बो बिंको सब स्यूं छोटोड़ो भाई हो साधू को भेष बना कर आयो हो। सोनल पिछाण कोनी सकी अर बिंने खारियो चका देवण री बात कही। बो भाई जादू जाणतो हो।बो सोनल री चूनडी लेली और सोनल नै हरी कैळ रो गाछ बना दियो। चूनड़ी लेज्यार आपरी लूगाई ने दे दी।
निकर्मो भाई गांव रै गुवाड़ में जा परो र बोल्यो.. सात भायां री सोनल बाई नै छाणां चुगती नै मोडियो भुळाई रै साधुड़ो भुळाई।
गांव हाळा जाण्यो सोनल ने साधू आपरै सागै भुळा चपळार लेग्यो दिसै।
एक आध दिनां में ही सोनल ने परनीजण खातर बिंको होवण हाळो बींद बरात लै परो र आ ग्यो।
गांव री कांकड पर थम कै छड़ो मारण बगी हरी कैळ री डाळी ल्यावण खातिर नाई नै भेज्यो।
नाई बीं सागण कैळ री डाळी तोड़न खातर हाथ लगायो जकी रै माइनै सोनल छोटे रूप में समायेड़ी ही ।
कैळ माइनै स्यूँ आवाज आई ' रै सुवा ' 'रै सुवा ' कैळ कण हलाई?
सुवो बोल्यो : सुणो बाइसा सुणो बाइसा, कैळ थांके सासरिये रा नाई सा हलाई।
सोनल बोली : सुणो नाई सा सुणो नाई सा...
पापी बिरो पाप कमायो ,सोनल बहन नै बो कैळ बणायो
चूनड़ी खोस लुगाई नै दिन्ही, सगळै गांव नै बो भरमायो।
नाई कैळ मांय मिनख ने बोलतां सुण परो पाछो भाजग्यो।
फेरूं सोनल रो जेठ आयो बो कैळ रै हाथ लगायो जणा आवाज आई... ' रै सुवा ' 'रै सुवा ' कैळ कण हलाई?
सुवो बोल्यो : सुणो बाइसा सुणो बाइसा, कैळ थांके सासरिये रा जेठ सा हलाई।
सुणो जेठ सा सुणो जेठ सा...
पापी बिरो पाप कमायो ,सोनल बहन नै बो कैळ बणायो
चूनड़ी खोस लुगाई नै दिन्ही, सगळै गांव नै बो भरमायो।
जेठ जी भी पाछा चल्या गया।
इण रै बाद सुसरो जी गया सागण बात बानै सुणाई
आखिर में सोनल रो बींद खुद गयो।
सगळी बात सुन परो बो समझ ग्यो कै आ कैळ ही सोनल है।
बो उण कैळ स्यूं एक कींगरी* बणवाई।
(कींगरी* राजस्थान का एक प्राचीन वाद्ययंत्र है)
कींगरी ले परो बो सब स्यूं बडे भाई रे घर गयो।
और बोल्यो : बडोड़े बीरे घर बोल म्हारी कींगरी !
कींगरी बोली रुण झुण।
इयाँ कर बो सातूं भायां रै घरै गयो अ'र छह भायां रै घरे कींगरी रुण झुण बोली।
आखिर में सातवें भाई के घरे जाकर बोल्यो
सातूंड़े पापीड़े घर बोल म्हारी कींगरी।
कींगरी बोली फड़ फड़।
बींद और सगळा गांव हाळा समझ ग्या कै सातवें भाई ही सोनल नै गायब करी है।
गांव हाळा मिल परा बिंनै जोरको कुट्यो जणा बो धाप्योड़ो सगळी बात बता कर सोनल नै कैळ स्यूं पाछी लड़की बना दी।
सातवें भाई और बिंकी लुगाई नै देश निकाळो दियो।
सोनल रो ब्याव धूम धाम स्यूं होयो ।
सोनल और बिंको बीन रस्या अ'र बस्या।
इति काणी गोगा राणी न सुणे बिंरी सासू काणी।
(वास्तविक और परंपरागत कहानी में सोनल को उसका भाई
मार कर चुनडी रंगता है, मैंने इसे संशोधित कर दिया है ताकि यह छोटे बच्चों पर नकारात्मक मनौवैज्ञानिक असर न डाल पाये)
This is not only a story but a legacy!!
ReplyDeleteपसंद करने के लिए धन्यवाद ,आभार ,अभिनन्दन आपका।
ReplyDelete🙏
nice story
ReplyDeleteशानदार कहानी और लेखन शैली.....��
ReplyDeletebahut achchi kahani hai
ReplyDelete